कितनी एकता है भारत की अनेकताओं में ?

भारत की एकता में ही अनेकता है 


नमस्कार दोस्तों एक बार फिर रूबरू होने आ गए है हम आप से एक नयी विषय के साथ, एक नयी सोच के साथ। 

हम आप सभी इस देश के निवाशी है यहाँ हमें हर चीज की आजादी मिली हुई है।  हमें बोलने का अधिकार है, हम अपनी बात कही भी कभी भी किसी  के भी सामने अपनी बात रख सकते है। अगर साफ और  सीधे शब्दो  कहूँ तो ये एक ऐसा देश है जहाँ अपनी मनमर्जी से जी सकते है और अगर आप संगठित हो और आपका संगठन मजबूत है तो आपको यह मनमानी करने से कोई  नहीं रोक सकता।


 भारत में एक दौर की तरह चल रहा है किसी को कुछ भी चाहिए सरकार या समाज से तो वो खुद को संगठित करना शुरू कर देते है। उसके बाद शुरू होता है बन्दर बाट, लोगो को एक दूसरे के खिलाफ भड़कना, अपने में ही बांटना लड़वाना ये सब होता है और हम आम लोग ही इनसब के साक्षी होते है कभी कुछ बोलते नहीं है। क्यों क्योंकी हमसे क्या हमारा इनसब से क्या लेना देना पर इसके सबसे बड़े शिकार भी हम ही  है यही हमारी सोच का फायदा उठाते है कुछ लोग 


अब कुछ ऐसे लोग जो थोड़े कटर और अपने देश और समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा रखते है तो उन्हें किसी और तरीके से इस्तेमाल किया जाता है बेचारे करे भी क्या, वो समाज जिसे हम मे से कोई नहीं जानता पर पीड़ित सब है उनसे ये समाज के ही लोग है जो नव जवान लोग जिन्हे कभी धर्म, कभी मजहब और  कभी जात, तो कभी समुदाय के नाम पर बाट दिए जाते है 

हम किसी भी धर्म, समाजया समुदाय  के हो हर जगह कोई न कोई ऐसा संगठन स्थापित होता है जो उनके अपने लोगो के मौलिक उन्मोलन का प्रयास करता हैऔर उन्हें संगठित सुरक्षित और उनके अधिकार उनको दिलाने के लिए प्रयास करता है 

कोई भी संगठन हो उसके कुछ मौलिक बिचार होते है जब आप उनपर गौर फरमाएंगे तो पता चलेगा की उनसब में बस संगठन का धर्म बस अलग होता है और बाकि सब सामान होते है 
  • हमें सभी धर्म का सम्मान करना चाहिए। 
  • हमें सदैव  जरूरत मंदो की मदत करनी चाहिए। 
  • भूखो को रोटी और नंगो को कपड़ा देना चाहिए।
                             ( नोट:यहाँ हम उन संगठन की बात कर रहे है जो सच में कुछ कर रहे है।  )


और भी बोहत सारी बाते जो उनके वेबसाइटो पर भरी पड़ी है पर क्या ये सभी लोग अपनी बातो पर अमल करते है। कुछ लोग जो इन्हे ब्लाइंड सुप्पोर्ट करते है वो सीने पर ठोंक कहेंगे की हा हम मानते है पर वो फला फला संगठन में बोहत कमी है वर्षो पहले कबीर कह गए है 

 बुरा  जो  देखन  मैं चला, बुरा ना  मिल्या कोई । 

जो  मन खोजा अपना , तो  मुझसा  बुरा ना कोई ।। 

कबीर सालो पहले ये बात कह गए पर हम कहा सुनने वाले है। हमें तो बस  दूसरों में बुराई ही खोजना है अपना पराया देखना है आज ये हालात है की एक छोटे से बचे को भी हिन्दू, मुस्लिम, शिख, और ईसाई  पता है। मैं उन लोगो से कहना चाहूंगा जो जिन्हें किसी एक धर्म के या किसी  समुदाय के लोगो के कष्ट दीखते है। ऐ हमदर्द जरा गौर से देख किस धर्म या समुदाय में अमीर गरीब नहीं है। किस समुदाय या धर्म में भ्रष्ट और दूस्ट लोग नहीं है ये मदत क्यों सिर्फ कुछ लोगो केलिए है क्यों सभी समुदाय सभी धर्म के लोगो के लिए नहीं है। 



हम क्यों किसी धर्म या समुदाय को संगठित करने के बदलेदेश को संगठित क्यों नहीं  करते है क्यों किसी समुदाय और धर्म के लोगो को  समुदाय के लोगो का कष्ट नहीं दिखता ? क्या अपने समुदाय और धर्म के लोगो का कष्ट ही दूर करना ही इंसानियत है, क्या किसी  धर्म या  समुदाय का दर्द कोई  और धर्म और समुदाय नै उठा सकता ? कब आएगा वो दिन जब हम दुसरो को सम्मान दिखने के लिए नहीं बल्कि उसको सम्मान करना हमारा संस्कार बनेगा 


 ये सवाल तो हमें उठा दिया और जबाब सबको पता है पर मैं ये चाहता हु की जो जबाब हम जानते है उससे देना भी आना चाहिए मई उमीद कटा हु आप सभी से जो भी इसे पढ़े अपने अनुसार अपना जबाब निचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे 

मैंने आपने तो लिख दिया अब आप की बरी है। 

                                                
धन्यवाद्
॥  जय हिन्द ॥
 ॥ जय भारत ॥ 




सपोर्ट इंडिया नीड्स इंडियन्स 
रीड मोर:-




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1 comments

  1. hame kuch v karne se pahle ek bar kam se kam apne desh k bare me soche.kisi ka help karne se pahle uska name na puchhe bas help kariye jarurt mand ka

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