We Proud to be an Indian....! Kyu?
हमें गर्व है भारतीय होने पर
नमस्कार मित्रो आज एक मर्तबा फिर हम आ गए है आप के सामने एक नए विषय के साथ, एक नयी चर्चा के साथ। अब चर्चा तो आम है इंडिया के लोगो के लिए, कोई भी न्यूज़ चैनल खोल के देख लो वहां दो चार लोग बैठे मिल अलग अलग एजेंडा और मुद्दों के साथ जो किसी ना किसी तरह की चर्चा तो जरूर कर रहे होंगे अपने को सही साबित करने को और उसे तन्मयता से देखने वाले भी मिल जाएंगे क्यों की इन चर्चाओं में ही तो उनकी सारी दर्द बया है। उन उनकी आप बीती होती है और वो कहानिया उनकी ही सी लगती है। ऊपर के सारे कारनामे देश के प्रशिद्ध बुद्धिजीवियों का है जिन्हे हमारे ही देश की मशाला न्यूज़ चैनलों द्वारा बुलाया तो जाता है समस्याओं का हल खोजने को देश की जनता को राह दिखाने को पर वहां तो एक नयी समस्या का जन्म होता है हर रोज। जिसका असर हम अपने जीवन पर भरपूर देखते है। ये वही लोग है जिनकी मानसिकता से प्रभावित होते है देश के वो छोटे छोटे लीडर जो होते तो छोटे ह पर खुद को बन्ने खा समझते है
आइए अब हम आप को देश के छोटे पर बहुत ही मह्त्वपूर्ण बन्ने खां के बारे में बताते है। दिखने में ये हम जैसे ही होते है आम लोगो जैसे रहते है, हमारे जैसे कपडे पहनते है हमारे जैसे ही बाटे भी करते है। ये आप को हर गली चौराहे पर अड्डा मरते हुऐ मिल जायेंगे। इनकी सबसे पसंदीदा जगह नुक्कड़ की चाय दुकान होती है।
देश की किसी भी चाय के दुकान पर चले जाओ वहां २-४ बन्ने खां जो अपने विषयों में महारत हासिल किये हुए मिल जाएंगे। बाते सुन लो उनकी लगेगा की भारत की बैग डोर नेहरू, इंद्रा, अटल और मोदी को छोड़ इनके हाथ में होते तो देश कब का तरक्की सीडिया चढ़ चूका होता। देश का दूसरा संसद ये चाय की दुकान हो गयी है जहां राष्ट्रहित और राष्ट्र चिंतन सबसे ज्यादा होता है
और हमारा आम नागरिक जिसके पास पावर तो बहुत है पर उस पॉवर को हम लोगो ने टुकड़े टुकड़े कर के रोटी कपड़ा और मकान जुटाने में लगे है। हम आम नागरिक अपने ही घर की जरूरतों को पूरा करने में परेशान है हमें बन्ने खां बनने का कोनो शौख नहीं है। अपना घर तो हमसे सम्हाला नहीं जाता ये देश क्या सम्हालेंगे। देश का कलयाण करने को को नेता है ना जिन्हे हमें पॉवर दें रखी है। अगर वो चोर निकला तो फिर २ -४ गलिया देंगे उसको। और फिर उसी को नेता बनाएंगे भगवान् जाने किस बिनाह पर हम उसे दुबारा सत्ता देते है और वो फिर वही करता है। क्यों की हम उन्हें सत्ता देते नहीं है वो हमसे सत्ता छीनते है उन्हें पता है की हम लोगो को कैसे बाटना है कैसे हमें लड़वाना है कैसे उन्हें हम सब के बिच में रह के हमारा अपना बन के अपना मतलब निकालना है। सिर्फ हमारी एक सोच की मुझ अकेले से क्या होगा ? ये हमें आज भी वही रखा है जहां से हम आजाद हुए थे बस वक़्त के साथ थोड़े ऊपरी बदलाव आ गए है हम मोर्डेन हो गए है पर हमारे मन और विचार आज भी वही है।
देश में सन ७०-८० के लोग चाचा ताऊ पापा पिता जी बन गए , ८५-९५ वाले भईया भईया बन्धु यार दोस्त हो गए और ९५-१६ तक बाबू बच्चा और छोटू हो गए। मैं ये सब इसलिए बोल रहा हु क्यों की ६० क दादा हो या ४० के पापा, ताऊ या २० का भैया या फिर वो जो कल जन्म लेग हम सब एक चीज कॉमन सुनते आये है की भाई भारत एक विकासशील देश है जो धीरे धीरे विकशित हो रहा है। पर हममे से कोई भी इन बातो पर धयान नहीं देता क्यों की हम कभी ये सोचते ही नहीं हैं की इसमें हमारा भी योगदान हो सकता है। ये एक ऐसी बात है जिसे सुनना या ना सुनना हमारे हाथ में है। ये हम पर है की हम अपने देश से कितना प्यार करते है.
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हैस टैग प्राउड टू बी अन इंडियन लिख देना ही क्या हमारा मात्र कर्त्तव्य है देश के प्रति या उससे बढ़ के भारत में आप किसी दूसरे से जबाब मांगने के हक़दार तो नै है पर एक जबाब हम खुद से तो मांग ही सकते है की आज तक हमने देश हित में बॉलीवुड की फिल्में देखने के आलावे क्या किया है। हम आप और देश की आने वाली पीढ़ी ये विकासशील के चोचलों पर चलेगा हम इन चोचलों पर भरोषा करते रहेंगे?
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जंगल में आग की कहानी तो सबने कही ना कही तो सुनी और पढ़ी होगी ,जिसमे एक चिड़िया अपने चोंच में पनि रख के ला ला के आग बुझाने की कोशिश करती है जब जब इस कहानी का जिक्र होता ह तब तब उस चिड़या का नाम आग बुझाने वालो में लिया जाता है बस एक इसी संकल्प के साथ बस आप सब से ये निवेदन करता हूँ की अपनी सदबुद्धि का प्रयोग करे और कोई वभी काम करने से पहले उस काम का प्रभाव देश हित में कितना होगा ये जान ले। ताकि जब भी देश निर्माण की बात हो तो हम सब का नाम जोडने वालो में लिया जाये न की बन्ने खां और तीसमारखां में और न ही उन गुमनाम नगिरोको में जिनका अपनी ही तीसरी पीढ़ी नाम नहीं जानती है जो गुमनामी में पैदा होते है और गुमनाम ही मर जाते है जिनके आने की ख़ुशी तो सबको होती है पर जाने का गम बस परिवार तक ही रह जाता है







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